सन 1991 में पहली वार महेंद्र कर्मा नाम के कांग्रेस के एक संसद नें आदिवासियों के खिलाफ जंग छेड़ी जिसे "जन जागरण अभियान" का नाम दिया गया| इस अभियान के लिए व्यापारी, उद्दयोग्पति और पूंजीपति वर्ग की और से पूरा सहयोग था| परन्तु यह अभियान जल्दी ही ख़त्म हो गया और इसे आगे बढ़ाने में वो कामयाब नहीं रहे| उसके बाद सरकार नें जब आदिवासियों की ज़मीन का सौदा टाटा (TATA ) और एस आर (ESSAR ) कंपनियों के साथ किया तो नक्सलियों से इन कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यहाँ police और CRPF को ख़ास तौर पर तैनात किया गया| और इसी का फायदा उठाते हुए जन जागरण अभियान एक बार फिर से जिंदा हो उठा|
परन्तु अब यह यह अभियान "सलवा जुडूम" के ना से जाना जाने लगा| "सलवा जुडूम" गोंडी भाषा का शब्द है जिसका अंग्रेजी में मतलब है Peace March .
"सलवा जुडूम" को आर्थिक सहायता महेंद्र कर्मा और छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से मिलती है और हथियार पहुँचाने का काम भी छत्तीसगढ़ सरकार का ही है| दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार नें इस बात से साफ़ इनकार कर दिया था की वो सलवा जुडूम को किसी भी तरह की सहायता दे रही है| परन्तु अप्रैल 2008 में सुप्रीम कोर्ट नें छत्तीसगढ़ सरकार को लताड़ते हुए सीधे सीधे शब्दों में कहा कि वो सलवा जुडूम को हथियार देना बंद करे और राज्य में पनप रही अराजकता की स्थिति को को ख़त्म करे|
सलवा जुडूम के कुछ कारनामे इस तरह से रहे :
परन्तु अब यह यह अभियान "सलवा जुडूम" के ना से जाना जाने लगा| "सलवा जुडूम" गोंडी भाषा का शब्द है जिसका अंग्रेजी में मतलब है Peace March .
"सलवा जुडूम" को आर्थिक सहायता महेंद्र कर्मा और छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से मिलती है और हथियार पहुँचाने का काम भी छत्तीसगढ़ सरकार का ही है| दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार नें इस बात से साफ़ इनकार कर दिया था की वो सलवा जुडूम को किसी भी तरह की सहायता दे रही है| परन्तु अप्रैल 2008 में सुप्रीम कोर्ट नें छत्तीसगढ़ सरकार को लताड़ते हुए सीधे सीधे शब्दों में कहा कि वो सलवा जुडूम को हथियार देना बंद करे और राज्य में पनप रही अराजकता की स्थिति को को ख़त्म करे|
सलवा जुडूम के कुछ कारनामे इस तरह से रहे :
- बलात्कार और हत्याएं - 4000
- गाँव जलाए और खाली करवाए - 644
- आदिवासी लोग उनकी जगह ज़मीन और इलाके से खदेड़े गए - 300,000 (जिनमे से 40 ,000 लोग कैम्पों में रह रहे हैं)





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